सच्ची मदद-एक नन्हा सा परिंदा

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सच्ची मदद-एक नन्हा सा परिंदा

सच्ची मदद-एक नन्हा सा परिंदा

एक बार की बात है एक नन्हा सा परिंदा अपने परिवार जनों से बिछुड़ कर अपने घोसले से बहुत दूर उड़कर आ गया था। उस नन्हे परिंदे को अभीअच्छी तरह से उड़ान भरना नहीं आता था।वावजूद इसके वह न जाने कैसे इतनी दूर आ गया था।

सच्ची मदद-एक नन्हा सा परिंदा

सच्ची मदद-एक नन्हा सा परिंदा

उधर नन्हे परिंदे के गायब हो जाने से उसके परिवार वाले बहुत परेशान थे, और उसके घर वापस आने की राह देख रहे थे। इधर विचारा नन्हा परिंदा भी यह समझ नहीं पा रहा था कि वह अपने घर तक कैसे पहुंचे?

वह उड़ान भरने की बहुत कोशिश कर रहा था, परन्तु बार-बार कुछ ऊपर उठ कर गिर जाता। एक तोता-तोती का जोड़ा यह दृश्य बड़े गौर से देख रहा था।

कुछ देर देखने के बाद वे युगल उस नन्हे परिंदे के करीब आ पहुंचे।

नन्हा परिंदा उन्हें अपने पास देखकर पहले घबरा गया, फिर हिम्मत जुटाकर उसने सोचा शायद ये लोग मेरी कुछ मदद करें और मुझे मेरे घर तक पहुंचा देंगे। तोते ने पूछा, ‘‘क्या हुआ नन्हे परिंदे, तुम बहुत परेशान दिखाई दे रहे हो?’’

नन्हे परिंदे ने तोते से कहा-‘‘मैं रास्ता भटक गया हूं और मुझे शाम होने से पहले अपने घर भी पहुंचना है। मुझे उड़ान भरना अभी अच्छी तरह से नहीं आता। मेरे घर वाले मेरे लिए बहुत परेशान हो रहे होंगे।

मैं बहुत देर से उडऩे का प्रयास कर रहा हूं, परन्तु मुझे इसमें कामयाबी नहीं मिल पा रही है। क्या आप मुझे उड़ना सिखा सकते हैं? अगर आप मुझे उडऩा सिखा दें, तो मैं अपने घर वापस पहुंच जाऊंगा और आपका यह उपकार मैं जीवन भर नहीं भूलूंगा।

नन्हे परिंदे का रुदन व करुणा निवेदन सुन कर उस तोते ने बड़े ही व्यंग्यपूर्ण भाव से कहा, ‘‘अरे बच्चे! जब तुमने उड़ना सीखा ही नहीं है तो फिर इतना दूर आने की क्या जरूरत थी? तुम अपने घौंसले में ही रहते।’’

तोते ने इसी प्रकार की अनेक चुभने वाली बातें करते हुए उस नन्हें परिंदे का उपहास करने लगा। वह बड़े ही अहंकारपूर्ण लफ्जों में बोला- ‘‘देखो, हम तो उड़ना जानते हैं और अपनी मर्जी से कहीं भी आ जा सकते हैं।’’

इतना कहकर तोता उस नन्हें परिंदे के सामने उड़ गया। और थोड़ी देर बाद वह तोता उसी जगह लौटकर आया और नन्हे परिंदे को दो-चार और कड़वी बातें बोल कर फिर से उड़ गया। ऐसा उसने पांच से छ: बार किया।

जब इस बार तोता उड़ कर वापस उसी जगह आया तो नन्हा परिंदा वहां नहीं था। तोते ने तोती से पूछा – उस नन्हें परिंदे ने उड़ान भर ली न?

उस वक्त तोते के चेहरे पर खुशी झलक रही थी। तोती ने कहा, ‘‘हां! नन्हे परिंदे ने तो उड़ान तो भर ली, परन्तु तुम इतना खुश क्यों हो रहे हो? तुमने तो उसे उडऩा नहीं सिखाया, बल्कि उसे उल्टी-सीधी बातें करके वेचारे का मजाक ही उड़ाया है।’’

तोती की बात सुन कर तोता हंस पड़ा और बोला – ‘‘यह सत्य है कि मैंने उस नन्हे परिंदे का मजाक उड़ाया है, लेकिन इसके पीछे मेरी कोई भावना गलत नहीं थी। तुमने तो केवल मेरी कड़वी बातों पर ही ध्यान दिया, लेकिन उस नन्हे परिंदे को मेरी इन्हीं कड़वी बातों से ही उडऩे का बल मिला है। उसने मेरी कड़वी बातों पर कम ध्यान दिया और उसके सामने मैंने जिस ढंग से उड़ान भर रहा था, वह उस पर ज्यादा ध्यान दे रहा था। इसका मतलब यह है कि उसने मेरी कड़वी बातों को अनदेखा करते हुए मेरी उड़ान भरने वाली चाल पर ज्यादा ध्यान दिया और वह उड़ान भरने में सफल भी हो गया। ’’

तोती फिर तोते से बोली, ‘‘जब तुम्हें उस नन्हें परिंदे को उड़ान भरना सिखाना ही था तो उसका मजाक बनाकर क्यों सिखाया?’’

तोता बोला, ‘‘भाग्यवान! वह नन्हा परिंदा अपने जीवन की पहली इतनी बड़ी उड़ान भर रहा था, और मैं उसके लिए अजनबी था। यदि मैं उसे उडऩा सिखाता, तो पहली बात यह कि वह पुरे जीवन  भर मेरे एहसान के नीचे दबा रहता और दूसरी इससे भी महत्वपूर्ण बात यह कि वह भविष्य में भी शायद “स्वयं” ज्यादा कोशिश नहीं करता। उसे दूसरों पर आश्रित होकर जीवन जीने की आदत पड़ जाती। मैंने उस नन्हें परिंदे के अंदर छिपी हुई लगन को लेखा लिया था।

जब मैंने उसे उड़ने की कोशिश करते हुए देखा था, तभी समझ गया था कि इसे बस थोड़ी-सी दिशा देने की जरूरत है, और जो मैंने उसे अनजाने में दी। और इस प्रकार वह अपनी मंजिल को पाने में कामयाब हुआ। अब वह पूरे जीवन में  स्वयं कोशिश करेगा और दूसरों से कम मदद मांगेगा।’’

सच्ची मदद-एक नन्हा सा परिंदा

दोस्तों सच्ची मदद वही होती है जो मदद पाने वाले को कभी यह महसूस न होने दे कि उसकी मदद की गई है। कई बार लोग सहायता तो करते हैं, परन्तु उसका ढिढोरा पीटने से नहीं चूकते। ऐसी मदद किस काम की! परिंदों की यह कहानी इंसानों के लिए भी एक सीख है, कि हम भी लोगों की मदद तो करें, पर उसे जताएं नहीं।

वास्तव में वे महापुरुष होते हैं जो हमें इस जीवन को सही प्रकार से जीने व जीवन की उड़ानें भरने की कला सिखाते हैं। वे हमारे भीतर छुपी क्षमताओं व संभावनाओं को पहचान लेते हैं और इन्हें जगा कर वे हमें इतना सक्षम बना देते हैं कि हम अपना सफर स्वयं पूरा कर सकें।

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