वाणी की चतुराई – धोबी और हाथी की कहानी

🐘वाणी की चतुराई – धोबी और हाथी की प्रेरक कहानी

एक विशाल राज्य के राजा के पास एक हाथी था। वह हाथी राजा को बहुत प्रिय था। हाथी बहुत ही समझदार था। वह कभी भी किसी को कोई नुकसान नहीं पहुँचाता था। इसलिए अक्सर राजा उसे विचरण करने के लिए खुला छोड़ देते थे।

वक्त बीतता गया, समय के साथ वह हाथी बूढ़ा हो गया था। राजा ने  उस हाथी को खुला छोड़ दिया और वह पूरे नगर में विचरण करने लगा।

राजा ने डुग्गी पिटवा दिया कि अगर किसी ने आकर हमसे यह कहा कि “हाथी मर गया” तो हम उसे सजा-ऐ मौत देंगे।

यह बात सुनकर राज्य के सभी लोग डरे हुए थे। हाथी जिसके भी दरवाजे पर जाता उस घर के लोग उस हाथी को खिला पिला कर जल्दी से आगे हाँक देते थे।

लोग यह सोचते थे कि कहीं अगर यह हाथी हमारे दरवाजे पर मर गया तो राजा से हमें कोई नहीं बचा पायेगा।

हाथी काफी जीर्ण अवस्था में था। उसकी हालात खराब होती जा रही थी। एक दिन चलते चलते वह हाथी एक धोबी के घर के पास गया।  धोबी ने तुरंत उसे जो कुछ संभव हो सका खिलाया।

धोबी हाथी को अपने घर से दूर करना चाह रहा था परन्तु हाथी वहां से दूर जाने के बजाय धोबी के द्वार पर ही बैठ गया।  और थोड़ी देर के बाद वहीं मर गया।

धोबी के द्वार पर आसपास के लोगो की भीड़ इकट्ठी होने लगी। सभी यही चर्चा कर रहे थे कि अब हाथी के मरने की खबर राजा को कौन देगा। कोई कहता है – भैया हाथी तो धोबी दे द्वार पर आकर मरा है, अब तो धोबी की खैर नहीं, जैसे ही धोबी राजा को हाथी के मरने की खबर देने जायेगा, राजा इसे जिन्दा नहीं छोड़ेंगे।

लेकिन धोबी बहुत ही चतुर और वाक् पटु था। उम्र आधी से ज्यादा बीत चुकी थी, जिससे जीवन का तजुर्बा भी बहुत था। शब्दों का हेरफेर वह बहुत अच्छी तरह से जानता था।

डर तो था ही, फिर भी हिम्मत करके धोबी राजा के पास गया।  और बोला महाराज – आपका हाथी मेरे द्वार पर आया और वहीं लेट गया। अब वह न तो उठ रहा है न बैठ रहा है। न ही हिल डुल रहा है, न खा रहा है न पी रहा है और न ही साँस ले पा रहा है।

राजा ने कहा- तो क्या “हाथी मर गया”। धोबी ने तुरंत कहा -महाराज यह मैं कैसे कह सकता हूँ। यह तो आप ही कह सकते हैं। क्योंकि मैं कहूंगा तो मुझे मृत्युदंड मिलेगा।

राजा धोबी की वाणी की चतुराई से बहुत प्रसन्न हुए और उसे इनाम के तौर पर स्वर्ण मुद्रायें उपहार स्वरुप भेंट किये।

🌈कहानी से सीख (Moral of the Story):

  • बुद्धिमानी और वाक्पटुता सबसे बड़ी ताकत है – सही शब्दों का चयन संकट में सुरक्षा और सफलता दिला सकता है।
  • साहस के साथ समझदारी भी जरूरी है – डर के बावजूद सोच-समझकर निर्णय लेना जीवन में लाभकारी होता है।
  • चतुराई से मुश्किलें आसान बनती हैं – हर समस्या का हल धैर्य और समझदारी से संभव है।
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