आचरण और ज्ञान – अच्छा व्यवहार ही सच्चा सम्मान है

🌾आचरण और ज्ञान – अच्छा व्यवहार ही सच्चा सम्मान है

एक समय की बात है। एक राज्य का राजा अपने राज्य के राज पुरोहित का बहुत सम्मान करता था। वे जब भी आते, राजा स्वयं अपने सिंहासन से उठकर उनका आदर-सत्कार करता। एक दिन राजा कहने लगा कि मेरे मन में एक प्रश्न है गुरु देव मुझे बताओ कि किसी व्यक्ति का आचरण महान होता है या उसका ज्ञान महान होता है।

राज पुरोहित ने राजा से कहा कि राजन मुझे कुछ दिन का समय दीजिए, उसके बाद मैं आपको इस प्रश्न का उत्तर दूंगा। राजा ने कहा कि गुरुदेव ठीक है।

राज पुरोहित अगले दिन राजा के खजाने में गए और वहां से कुछ सोने के सिक्के उठाकर अपनी गठरी में रख लिए। कोषाध्यक्ष चुपचाप सब कुछ देख रहा था लेकिन यह सोचकर चुप रहा कि वह राजा का पुरोहित है। राज पुरोहित कुछ दिनों तक ऐसा ही करते रहे। राजकोष में जाने के बाद सोने के सिक्कों की गठरी में रखकर वापस आ जाता था।

कोषाध्यक्ष ने सारी कहानी राजा को बता दी। राज पुरोहित एक दिन राजा के महल पहुंचे, आज न तो राजा स्वयं उन्हें लेने गए और न ही सम्मान में सिंहासन से उठे। राज पुरोहित समझ गए कि मेरे सोने के सिक्के चोरी करने की बात राजा तक पहुंच गई है।

राजा ने भौहें उठाईं और पूछा, क्या तुमने खजाने से सोने के सिक्के चुराए हैं? राज पुरोहित ने कहा कि हां राजन, यह सच है। राजा को गुस्सा आया और उसने पूछा कि तुमने ऐसा क्यों किया?

राज पुरोहित ने कहा कि मैंने जानबूझकर सोने के सिक्के चुराए क्योंकि मैं आपको दिखाना चाहता था कि किसी व्यक्ति का आचरण या ज्ञान महान है या नहीं।

राजन, जब तुम्हें पता चला कि मैंने सोने के सिक्के चुरा लिए हैं, तो तुम मेरे लिए खड़े नहीं हुए, इसके विपरीत तुमने मुझ पर क्रोध से भौहें चढ़ा लीं। सोने के सिक्के उठाने से पहले भी ज्ञान मेरे पास था और उठाने के बाद भी ज्ञान मेरे पास था। लेकिन ज्यों ही तुम्हें पता चला कि मैं चोर हूं, तुम्हारे मन में मेरे लिए जो सम्मान था, वह लगभग जाता ही गया।

राजन अब आपको अपने प्रश्न का उत्तर मिल गया होगा। मेरे आचरण के कारण आप मेरा सम्मान करते थे, जैसे ही मेरा आचरण बदल गया, आपने मेरा सम्मान नहीं किया।

इसलिए हमें अपना व्यवहार हमेशा अच्छा रखना चाहिए। क्योंकि अगर हमारा आचरण अच्छा नहीं है तो हमारी शिक्षा, पद और धन भी हमें सम्मान नहीं दिला सकता।

🌿कहानी से सीख (Moral of the Story):

  • ज्ञान से बड़ा होता है आचरण।
  • अच्छा व्यवहार व्यक्ति को सच्चा सम्मान दिलाता है।
  • पद और प्रतिष्ठा तभी टिकती है जब हमारा आचरण श्रेष्ठ हो।
  • सम्मान शब्दों से नहीं, कर्म और चरित्र से मिलता है।
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