Monday, January 12, 2026

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वैदिक गणित: आसानी से तेज़ गणना सीखने की संपूर्ण गाइड (16 सूत्र + उदाहरण)

वैदिक गणित (Vaidik Ganit): 16 सूत्रों की आसान व्याख्या, उदाहरण और अभ्यास प्रश्न

गणित हमेशा से बच्चों और बड़ों के लिए कठिन माना गया है, लेकिन हमारे भारत के प्राचीन ज्ञान में एक ऐसी गणितीय विधि है जो कठिन से कठिन गणनाएँ भी मज़ेदार और आसान बना देती है। इसे कहते हैं वैदिक गणित (Vaidik Ganit ).

Vaidik Ganit सिर्फ गणित हल करने का तरीका नहीं है, बल्कि यह दिमाग को तेज़, रचनात्मक और सक्रिय बनाने की कला है।
इसमें 16 प्रमुख सूत्र और 13 उपसूत्र हैं, जिनकी मदद से आप जोड़, घटाव, गुणा, भाग, वर्ग, वर्गमूल, समीकरण—सब कुछ बहुत तेज़ी से कर सकते हैं।

आज आप इस पोस्ट में सीखेंगे:

  • वैदिक गणित क्या है
  • इसकी विशेषताएँ
  • 16 सूत्र आसान हिन्दी में
  • हर सूत्र के उदाहरण
  • अभ्यास प्रश्न

यह पूरा लेख आप अपने बच्चे को पढ़ा सकते हैं या प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी में उपयोग कर सकते हैं।

वैदिक गणित क्या है? (What is Vaidik Ganit?)

वैदिक गणित भारत की प्राचीन गणितीय परंपरा है, जिसे जगद्गुरु स्वामी भारती कृष्ण तीर्थ ने लिखा और 1965 में पुस्तक के रूप में प्रकाशित किया। इस पूरी प्रणाली का आधार है 16 मुख्य सूत्र और 13 उपसूत्र, जिनसे गणित का हर हिस्सा आसानी से हल किया जा सकता है।

यह प्रणाली अथर्ववेद के सिद्धांतों पर आधारित मानी जाती है।

Vaidik Ganit की खूबसूरती क्या है?  इसकी खासियत यह है कि:

  • गणना बहुत तेज़ होती है
  • दिमाग़ सक्रिय और sharp बनता है
  • जटिल सवालों के सरल तरीके मिलते हैं
  • बच्चे भी इसे खेल-खेल में सीखते हैं
  • प्रतियोगी परीक्षा में समय बचता है

आज पूरी दुनिया vaidik ganit को सम्मान देती है, और कई देश इसे स्कूलों में भी पढ़ा रहे हैं।

सबसे बड़ी बात—vaidik ganit मज़ेदार है!

चलिये अब हम 16 सूत्रों को आसान भाषा में और वास्तविक उदाहरणों के साथ सीखते हैं।

वैदिक गणित की 16 सूत्र — आसान भाषा में (Vaidik Ganit ke Sutra)

अब हम सभी 16 सूत्रों को आसान हिन्दी और आसान उदाहरणों के साथ समझेंगे।

1. एकाधिकेन पूर्वेण (पहले वाले से एक अधिक के द्वारा)

यह सूत्र मुख्यतः 5 पर समाप्त होने वाली संख्याओं का वर्ग (square) झटपट निकालने में उपयोग होता है।

फॉर्मूला:
( n5 )² = n × (n+1) | 25

उदाहरण 1: 35²
  1. पहले 3 (दहाई का अंक) लो
  2. उसका एक अधिक: 3+1 = 4
  3. दोनों का गुणन: 3 × 4 = 12
  4. अंत में 25 जोड़ दो → 1225

👉 उत्तर: 35² = 1225

उदाहरण 2: 125²
  1. 12 का एक अधिक = 13
  2. 12 × 13 = 156
  3. अंत में 25 जोड़ → 15625

👉 उत्तर: 125² = 15625

यह तरीका सबसे तेज़ है।

उदाहरण:

35² = 3×4 | 25 = 1225
65² = 6×7 | 25 = 4225
125² = 12×13 | 25 = 15625

अभ्यास:

45² = ?
85² = ?
115² = ?

2. निखिलं नवतश्चरमं दशतः (सबको 9 से, अंतिम को 10 से)

यह सूत्र ऐसी संख्याओं का गुणन आसानी से करता है जो 10, 100 या 1000 के पास हों।

उदाहरण: 97 × 96
  1. दोनों 100 के करीब हैं
  2. 100–97 = 3
  3. 100–96 = 4
  4. Cross-subtraction → 97–4 = 93
  5. अब 3×4 = 12
  6. उत्तर → 9312

बहुत आसान!

अभ्यास:

99×97 = ?
96×94 = ?
89×91 = ?

3. ऊर्ध्वतिर्यग्भ्याम् (ऊपर-से और तिरछे-से)

यह बड़ी संख्याओं का तेज़ गुणन सिखाता है।

उदाहरण: 23 × 14
  1. सीधा: 3×4 = 12
  2. तिरछा: 2×4 + 1×3 = 8 + 3 = 11
  3. सीधा: 2×1 = 2

अब carry जोड़कर:

322

👉 उत्तर: 23 × 14 = 322

उदाहरण:

23 × 14
= 3×4 | (2×4 + 1×3) | 2×1
= 12 | 11 | 2
= 322

अभ्यास:

34×12 = ?
56×21 = ?
78×24 = ?

4. परावर्त्य योजयेत् (उलटकर जोड़ना)

अर्थ: “उलटकर जोड़ो / विपरीत का उपयोग करो।”
यह सूत्र मुख्य रूप से भाग (division) में उपयोग होता है, खासकर तब जब भाजक 10 से बड़ा होता है।

यह भाग (division) को आसान बनाता है।

उदाहरण 1: 1 ÷ 12 निकालना

12 का परावर्त्य (Reciprocal approximation) = 0.083

वैदिक गणित कहता है—
12 को 10 + 2 मानो → 2 को उलटकर (परावर्त्य) जोड़ते जाओ।

इससे हमें मिलता है:
1/12 ≈ 0.083333…

उदाहरण 2: 235 को 11 से भाग देना

11 का परावर्त्य = -1 (क्योंकि 11 = 10 + 1)

स्टेप:

  1. 235 को अलग-अलग लिखें → 2 | 3 | 5

  2. उल्टा जोड़:

    • पहले 2

    • 2 + 3 = 5

    • 5 + 5 = 10

इसका उत्तर लगभग = 21.3

अभ्यास प्रश्न:
  1. 1 ÷ 14 निकालें

  2. 356 ÷ 11

  3. 1 ÷ 16

5. शून्यं साम्यसमुच्चये (समान होने पर परिणाम शून्य)

यह समीकरण हल करने में काम आता है।

उदाहरण:

यदि दोनों पक्षों में x वाले पदों के गुणक समान हों:

5x + 3 = 5x + 11

यह असंभव है क्योंकि x वाले भाग बराबर हैं, तो केवल स्थिरांक देखकर निर्णय किया जाता है:

3 ≠ 11 → कोई हल नहीं

6. आनुरूप्ये शून्यमन्यत् — “अनुपात समान हो, दूसरा भाग शून्य”

अर्थ: “जब दोनों संख्या एक जैसी कमी में हों, दूसरी चीज़ शून्य बन जाती है।”
यह उपयोग होता है जब दोनों संख्याएँ किसी बड़े बेस (10, 100, आदि) से समान अंतर पर हों।

दोनों संख्याएँ एक समान अनुपात में हों, तो गणना सरल हो जाती है।

उदाहरण:

99×98 → दोनों 100 के करीब
तो सूत्र 2 जैसा ही फॉलो करें।

उदाहरण 1: 98 × 102

दोनों 100 के करीब हैं।
98 = 100 – 2
102 = 100 + 2
दोनों की कमी/बढ़त “2” है → समान

वैदिक तरीका:
  1. पहली संख्या + दूसरी संख्या का अंतर
    = 98 + 2 = 100

  2. -2 × +2 = –4

तो उत्तर = 10000 – 4 = 9996

उदाहरण 2: 89 × 91

दोनों 90 के बराबर अंतर पर → अंतर = 1
89 = 90 – 1
91 = 90 + 1

उत्तर = 90² – 1² = 8100 – 1 = 8099

अभ्यास प्रश्न:
  1. 97 × 103

  2. 48 × 52

  3. 109 × 111

7. संकलन-व्यवकलनाभ्याम् (जोड़कर-घटाकर)

यह दो समीकरण हल करने में काम आता है।

उदाहरण:

2x + 3y = 11
3x – 2y = 4

दोनों जोड़ें
घटाएँ
उत्तर पाएं

उदाहरण:

x + y = 10
x – y = 4

जोड़ → 2x = 14 → x = 7
घटाएँ → 2y = 6 → y = 3

8. पूरणापूरणाभ्याम् (पूरा कर दो – अपूर्ण कर दो)

इससे बहुपद (polynomials) को factor करना आसान होता है।

उदाहरण:

x² + 5x + 6
यहाँ 6 को 2×3 लिखकर पूरा कर लो:
= (x+2)(x+3)

9. चलनकलनाभ्याम् (बदलकर-करके)

अर्थ: “चलन और कलन की क्रियाओं द्वारा”
यह सूत्र मुख्य रूप से द्विघात समीकरण (Quadratic Equation) के मूल (roots) निकालने में उपयोग होता है।

यह बिल्कुल वैसे ही काम करता है, जैसे हम school में quadratic formula से करते हैं, पर बहुत तेज़ी और आसान तरीके से।

उदाहरण 1: समीकरण → 7x² – 11x – 7 = 0

वैदिक गणित तरीका:

स्टेप 1: दो संख्याएँ खोजो

ऐसी दो संख्या चाहिए जिनका:

  • गुणन = (a × c) = 7 × –7 = –49
  • योग = b = –11

दो संख्याएँ हैं:
–14 और +3
क्योंकि:
-14 × 3 = –42 ⟵ लगभग
(यहाँ वैदिक तरीका “approximations” का उपयोग कर split करता है)

स्टेप 2: splitting the middle term

7x² – 14x + 3x – 7 = 0

स्टेप 3: समूह बनाओ

7x(x – 2) + 1(3x – 7)

(यहाँ चलन-कलन से terms को adjust किया जाता है)

स्टेप 4: factors

(7x + 1)(x – 1)

उत्तर:

x = –1/7
x = 1

उदाहरण 2: x² – 5x + 6 = 0

गुणन = 6
योग = –5
दो संख्याएँ: –2 और –3

फैक्टर:
(x – 2)(x – 3)

उत्तर: x = 2, 3

(यही चलनकलन की direct application है)

अभ्यास प्रश्न (सूत्र 9):
  1. x² – 7x + 12 = 0
  2. 3x² – 5x – 2 = 0
  3. 2x² + x – 3 = 0

10. यावदूनम् (जितना कम है)

10, 100, 1000 के पास वाली संख्याओं का वर्ग निकालने में उपयोग।

उदाहरण: 98²

100 से 2 कम → 100−2
→ (98 + 2) = 100
→ 2² = 4
उत्तर → 9604

अभ्यास:

97² = ?
94² = ?

11. व्यष्टि-समष्टि (एक से संपूर्ण, संपूर्ण से एक)

अर्थ: “एक को पूर्ण मानकर बाकी को मिलाओ।”
यह सूत्र द्विघात समीकरण (quadratic equations) में उपयोग होता है।

यह जटिल समीकरणों को सरल करता है।

उदाहरण: x² + 7x + 12 = 0

हमें 12 के ऐसे दो गुणनखंड चाहिए जिनका योग 7 हो:

3 + 4 = 7
3 × 4 = 12

तो factors = (x + 3)(x + 4)

उत्तर: x = –3, –4

अभ्यास प्रश्न:
  1. x² + 9x + 20

  2. x² + 11x + 24

  3. x² + 6x + 8

12. शेषाण्यंकेन चरमेण (अंतिम अंकों से शेष)

अर्थ: “अंतिम अंक से शेष निकालो।”
यह सूत्र fraction → decimal बदलने में बहुत काम आता है।

भिन्न को दशमलव में बदलने में उपयोग होता है।

उदाहरण: 1/7 को दशमलव में

1/7 = 0.142857… (चक्र लगता है)

प्रक्रिया:
7 बार-बार अंतिम अंक पर विभाजित होता है और वही पैटर्न दोहराता है।

उदाहरण 2: 1/8

8 से भाग:
1 → 0.125

अभ्यास प्रश्न:

  1. 1/6
  2. 1/9
  3. 5/12

13. सोपान्त्यद्वयमन्त्यम् (अंतिम और उपांतिम का योग)

अर्थ: “अंतिम और उपांतिम का योग / गुणन।”
सरल बीजगणितीय सरलीकरण में उपयोग होता है, खासकर जब नम्बर AP में हों।

विशिष्ट बीजगणितीय पहचान में उपयोग होता है।

उदाहरण

मान लीजिए सरल करना है:
(3 + 4 + 5)

अंतिम = 5
उपांतिम = 4
योग = 9

→ कई बीजगणितीय रूपों में यही जोड़/घटाव उपयोग होता है।

उदाहरण 2

यदि a, a+d, a+2d हों
तो उपांतिम + अंतिम = (a+d) + (a+2d)

 अभ्यास प्रश्न:
  1. (4 + 5 + 6)
  2. AP: 7, 10, 13 → अंतिम + उपांतिम

सरल करें: (x + (x+2) + (x+4))

14. एकन्यूनेन पूर्वेण (पहले से एक कम के द्वारा)

अर्थ: “पहले वाला जो है उससे एक कम का उपयोग करो।”
यह विशेषकर गुणा और घटाव को आसान बनाने में उपयोग होता है।

इसका सबसे प्रसिद्ध प्रयोग है—

5 पर समाप्त होने वाली संख्या का वर्ग (Square) तुरंत निकालना

उदाहरण 1: 35²

35 = 3 | 5

स्टेप:
1️⃣ पहले भाग की संख्या = 3
उससे एक कम = 4
दोनों को गुणा = 3 × 4 = 12
2️⃣ अंत में हमेशा 25 जोड़ें

👉 35² = 1225

उदाहरण 2: 95²

95 = 9 | 5
9 का अगला = 10

→ 9 × 10 = 90
→ 90 + ”25″ जोड़ो

👉 95² = 9025

उदाहरण 3: 125 × 125

पहला भाग = 12
अगला = 13

12 × 13 = 156

→ अंत में 25

👉 125 × 125 = 15625

उदाहरण 4: 75²

7 × 8 = 56
→ 5625

👉 75² = 5625

 यह क्यों काम करता है?

क्योंकि यह सूत्र इस identity पर आधारित है:
(10x + 5)² = 100x(x+1) + 25

अभ्यास प्रश्न (सूत्र 14):
  1. 45²
  2. 85²
  3. 155²
  4. 65²
  5. 115 × 115

15. गुणित-समुच्चयः (गुणन का समुच्चय)

अर्थ: “गुणितों का कुल योग।”
यह सूत्र quadratic equations में verification के लिए उपयोग होता है।

उदाहरण:

समीकरण:
x² + 5x + 6 = 0
फ़ैक्टर: (x + 2)(x + 3)

गुणित समुच्चय:
2 + 3 = 5 ← यह x का coefficient है

सत्यापित → सही factorization

अभ्यास प्रश्न:
  1. जाँचें: x² + 8x + 15 = (x+3)(x+5)
  2. x² + 10x + 21
  3. x² + 12x + 32

16. गुणक-समुच्चयः (गुणकों का समुच्चय)

द्विघात समीकरण factor करने में मदद करता है।

अर्थ: “गुणकों का योग”
यह भी quadratic equation factoring में उपयोग होता है।

उदाहरण

x² + 9x + 20

20 के दो गुणक खोजो → 4 और 5
4 + 5 = 9 → सही

फैक्टर:
(x + 4)(x + 5)

अभ्यास प्रश्न:
  1. x² + 13x + 40
  2. x² + 14x + 48
  3. x² + 7x + 10

🌻 निष्कर्ष – Vaidik Ganit ke sutra एक गेम चेंजर है!

वैदिक गणित सिर्फ गणित सीखने की विधि नहीं है—यह तेज़ दिमाग, बेहतर फोकस, और तेज़ गणना कौशल का आधार है।
इसे सीखकर बच्चे भी चुटकियों में बड़े सवाल हल कर देते हैं। प्रतियोगी परीक्षाओं में यह सुपरपावर जैसा है।

बिना तनाव, बिना डर—vaidik ganit गणित को मज़ेदार बना देता है!

क्यों सीखें वैदिक गणित (vaidik ganit)?

  • दिमाग तेज
  • calculation speed दोगुनी
  • exam में समय बचाए
  • गणित का डर खत्म
  • दिमागी क्षमता बढ़ाए
  • बच्चों के लिए बहुत उपयोगी

Vaidik Ganit एक ऐसी कला है जिसे हर उम्र का व्यक्ति सीख सकता है।

 

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