भगवद् गीता से जीवन बदलने वाले 5 श्लोक
हम सभी ने ये कहावत सुनी है कि “हर समस्या का एक हल होता है”, बस हमें उसे पहचानना और अपनाना होता है। भगवद् गीता हिंदुओं की एक पवित्र ग्रंथ है, जो हमारे जीवन के उद्देश्य और हर इंसान के सामने आने वाली कठिनाइयों और उनके समाधान बताती है। इसमें भगवान कृष्ण और अर्जुन के बीच हुई बातचीत है, जिसमें भगवान कृष्ण ने धर्म, कर्म, भक्ति योग, आत्मा और परमात्मा के बारे में ज्ञान दिया।
भगवद् गीता में कुल 700 श्लोक हैं, जिन्हें 18 अध्यायों में बांटा गया है। यहाँ हम कुछ महत्वपूर्ण और जीवन बदलने वाले 5 श्लोकों का सरल अर्थ और उनकी उपयोगिता समझेंगे, जो आज के समय में भी बेहद प्रासंगिक हैं।
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काम, क्रोध और लोभ का त्याग करें
श्लोक:
त्रिविधं नरकस्येदं द्वारं नाशनमात्मनः।
कामः क्रोधस्तथा लोभस्तरमादेतत्त्रयं त्यजेत्।।
अर्थ:
लालच (लोभ), गुस्सा (क्रोध) और इच्छा (काम) नर्क के तीन द्वार हैं। ये तीनों हमारे दुखों का कारण हैं। भगवान कृष्ण कहते हैं कि इन तीनों से दूर रहना चाहिए ताकि जीवन में शांति और सुख आए।
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इन्द्रियों पर नियंत्रण रखें
श्लोक:
तानि सर्वाणि संयम्य युक्त आसीत मत्परः।
वशे हि यस्येन्द्रियाणि तस्य प्रज्ञा प्रतिष्ठिता।।
अर्थ:
हमारी इन्द्रियाँ – आंखें, कान, नाक, जीभ, त्वचा और मन – हमें भौतिक सुख और दुख दोनों से जोड़ती हैं। जो व्यक्ति अपनी इन्द्रियों को नियंत्रित करता है, उसकी बुद्धि मजबूत और स्थिर होती है।
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कर्म करते रहो, फल की चिंता मत करो
श्लोक:
योगस्थः कुरु कर्माणि संग त्यक्त्वा धनंजय।
सिद्धयः सिद्धयोः समो भूत्वा समत्वं योग उच्यते।।
अर्थ:
हमें अपने कर्तव्य को पूरी निष्ठा से करना चाहिए, बिना फल की चिंता किए। कर्म करते हुए मन को स्थिर रखना योग कहलाता है।
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मन को शांति दो, संदेह को दूर करो
श्लोक:
नास्ति बुद्धिरयुक्तस्य न चायुक्तस्य भावना।
न चाभावयतः शान्तिरशान्तस्य कुतः सुखम्।।
अर्थ:
जो व्यक्ति मन को शांत नहीं रखता और हमेशा संदेह करता रहता है, उसे कभी सुख नहीं मिलता। शांति और सुख मन से ही प्राप्त होते हैं।
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काम, क्रोध और अहंकार छोड़ो और शांति पाओ
श्लोक:
विहाय कामान् यः कर्वान् पुमांश्चरति निस्पृहः।
निर्ममो निरहंकारः स शान्तिमधिगच्छति।।
अर्थ:
जो व्यक्ति इच्छा, गुस्सा, और अहंकार छोड़कर अपने कर्तव्य का पालन करता है, वही सच्ची शांति को प्राप्त करता है।
निष्कर्ष
भगवद् गीता के ये श्लोक हमें सिखाते हैं कि जीवन की समस्याओं का समाधान भीतर की शांति और सही कर्म में छुपा है। अगर हम इन शिक्षाओं को अपनाएं, तो न केवल हमारा जीवन बल्कि हमारे आस-पास का माहौल भी बेहतर हो जाएगा।
याद रखें, “भगवान कभी ऐसा ताला नहीं बनाते, जिसका चाबी न हो”। और भगवद् गीता ही वह चाबी है जो हर समस्या का समाधान देती है।

