अकबर बीरबल की 12 सर्वश्रेष्ठ कहानियाँ | akbar birbal story in hindi short
अकबर और बीरबल की कहानियाँ हमारे बचपन की सबसे यादगार कहानियों में से एक हैं। उनकी दोस्ती, समझदारी और हाजिरजवाबी आज भी बच्चों और बड़ों दोनों को हँसा देती है और सोचने पर मजबूर भी करती है।
इस संग्रह में आपको akbar birbal story in hindi short का एक खास, सुंदर और सरल रूप मिलेगा—जहाँ हर छोटी-सी कहानी में बड़ी सीख छुपी है।
चाहे आप बच्चों को सोने से पहले कहानी सुनाना चाहते हों या खुद कुछ हल्का-फुल्का और ज्ञान से भरा पढ़ना चाहते हों, ये (Akbar Birbal Story in Hindi short) कहानियाँ आपके दिल को जरूर छू जाएँगी।
अकबर बीरबल की 12 सर्वश्रेष्ठ कहानियाँ | akbar birbal story in hindi short
1. बीरबल की खिचड़ी
सर्दियों का मौसम था। ठंडी हवा हड्डियों तक चुभ रही थी। ऐसे में अकबर और बीरबल झील के किनारे घूम रहे थे। अकबर ने उत्सुकता में झील के पानी में अपनी उंगली डाली और तुरंत निकाल ली।
“बीरबल! कोई इंसान इस पानी में रातभर खड़ा नहीं रह सकता।”
बीरबल मुस्कुराए—
“महाराज, मैं एक ऐसा आदमी ढूँढ के ला सकता हूँ जो यह कर सके।”
अगले दिन एक गरीब आदमी तैयार हो गया क्योंकि उसे 1000 सोने के सिक्कों की जरूरत थी।
वह पूरी रात ठंडे पानी में काँपते हुए खड़ा रहा।
दो सैनिक पहरा देते रहे।
सुबह वह उम्मीद लेकर दरबार पहुंचा।
लेकिन अकबर ने उसकी बात सुनकर कहा—
“तुम्हें दूर जलते दीपक से गर्मी मिल रही थी। तुम इनाम के योग्य नहीं।”
बेचारा गरीब रोते हुए बीरबल के पास गया।
अगले दिन बीरबल दरबार नहीं आए।
अकबर खुद देखने गए और देखा कि बीरबल आग से बहुत दूर रखे बर्तन में ‘खिचड़ी’ पका रहे थे।
अकबर ने हैरानी से पूछा—
“बीरबल! इतनी दूर से खिचड़ी कैसे पकेगी?”
बीरबल ने शांत आवाज़ में कहा—
“महाराज! अगर दूर रखी दीपक की रोशनी उस गरीब को गर्मी दे सकती है, तो यह खिचड़ी भी दूर से पक सकती है।”
अकबर समझ गए कि उन्होंने गलती की थी।
उन्होंने तुरंत गरीब को इनाम दिया।
गरीब की आँखों में आँसू थे, लेकिन इस बार खुशी के।
कहानी से सीख:
उम्मीद की एक छोटी किरण भी इंसान को बड़ी-बड़ी मुश्किलों का सामना करने की ताकत देती है।
2. मूर्ख चोर
एक अमीर व्यापारी बहुत घबराया हुआ अकबर के दरबार पहुँचा। उसकी दुकान में चोरी हो गई थी।
उसके चेहरे पर चिंता साफ झलक रही थी।
अकबर ने तुरंत बीरबल को बुलाकर कहा—
“इस गरीब व्यापारी की मदद करो।”
व्यापारी ने बताया कि उसे अपने एक नौकर पर शक है।
बीरबल ने सभी नौकरों को बुलाया और उन्हें एक सीधी कतार में खड़ा किया।
सभी नौकर सफ़ाई देने लगे—
“हुज़ूर, हमने कुछ नहीं किया।”
बीरबल ने शांत भाव से सबको एक–एक छड़ी दी और कहा—
“चोर की छड़ी कल सुबह दो इंच बढ़ जाएगी।”
सभी हैरान रह गए।
रातभर चोर बेचैन रहा—
“अगर छड़ी सच में बढ़ गई तो?”
डर के कारण उसने अपनी छड़ी दो इंच काट दी।
अगले दिन बीरबल ने सभी की छड़ियों को देखा और मुस्कुरा कर कहा—
“चोर यही है!”
व्यापारी चौंक गया—
“पर आप कैसे पहचान गए?”
बीरबल ने कहा—
“निर्दोष आदमी को कोई डर नहीं होता। लेकिन चोर अपने डर के कारण अपनी ही छड़ी काट बैठा।”
कहानी से सीख:
सच बोलने वाला कभी नहीं डरता, लेकिन गलत काम करने वाला हमेशा डर में जीता है।
3. बीरबल और अंगूठी चोर
एक दिन दरबार में हलचल मची हुई थी। अकबर की एक कीमती अंगूठी — जो उन्हें उनके पिता ने भेंट की थी — गायब हो गई थी।
अकबर बेहद दुखी थे क्योंकि यह अंगूठी सिर्फ सोने की नहीं, बल्कि यादों की निशानी थी।
बीरबल को बुलाया गया।
सारा दरबार खड़ा था और सभी के चेहरे पर परेशानी के भाव थे।
बीरबल ने दरबारियों को ध्यान से देखा और तेज आवाज़ में कहा—
“जिस व्यक्ति के पास महाराज की अंगूठी है, उसकी दाढ़ी में आज एक तिनका फंसा होगा।”
इतना सुनते ही सभी दरबारी एक-दूसरे को देखने लगे।
लेकिन एक दरबारी अचानक अपनी दाढ़ी को छूने लगा।
उसके चेहरे पर घबराहट साफ दिख रही थी।
बीरबल ने इशारे से सैनिकों को बुलाया।
सिपाहियों ने उस आदमी की तलाशी ली और अंगूठी मिल गई।
अकबर ने हैरानी से पूछा—
“बीरबल, तुम्हें कैसे पता चला?”
बीरबल हँसकर बोले—
“महाराज, दोषी इंसान चाहे कितना भी छिपा ले, लेकिन उसके मन का डर उसके शरीर की हर हरकत में दिख जाता है।”
अकबर बीरबल की बुद्धिमत्ता से बेहद खुश हुए।
कहानी से सीख:
गलत काम करने वाला हमेशा डर जाता है, लेकिन सच्चाई कभी नहीं छिपती।
4. कुएं का पानी
एक गरीब किसान बहुत परेशान था। उसे अपने खेतों को सींचने के लिए पानी चाहिए था।
कई दिन तलाश करने के बाद उसे एक कुआँ मिला। उस कुएँ का मालिक एक लालची व्यापारी था।
किसान ने विनती की—
“भाई, मुझे थोड़ा पानी दे दो। मेरे खेत सूख रहे हैं।”
व्यापारी ने कहा—
“पानी चाहिए, तो पूरा कुआँ खरीद लो।”
बेचारा किसान मजबूरी में अपनी सारी जमा-पूँजी देकर कुआँ खरीद लेता है।
अगले दिन जब किसान पानी लेने जाता है, तो व्यापारी फिर आ जाता है और कहता है—
“मैंने कुआँ बेचा है, पानी नहीं।”
किसान रोता-रोता अकबर के दरबार पहुंचा।
अकबर ने बीरबल को बुलाया।
अगले दिन व्यापारी को दरबार में पेश किया गया।
व्यापारी अपनी बात पर अड़ा रहा—
“महाराज, कुआँ बेचा था… पानी नहीं।”
बीरबल ने शांत स्वर में कहा—
“ठीक है, यदि कुआँ किसान का है तो पानी तुम्हारा है। तुरंत जाकर अपना पानी कुएँ से निकाल लो। किसान तुम्हारा पानी नहीं रख सकता।”
सारा दरबार हँस पड़ा।
लालची व्यापारी चुप हो गया और उसने तुरंत अपनी गलती मान ली।
किसान की आँखों में राहत के आँसू थे।
वह बीरबल को दिल से धन्यवाद देता है।
कहानी से सीख:
धोखा देने वाला अंत में खुद ही मुश्किल में फँसता है।
5. बुद्धि का घड़ा
एक दिन किसी बात पर नाराज़ होकर अकबर ने बीरबल को राज्य छोड़ने का आदेश दे दिया।
बीरबल दुखी मन से राज्य छोड़कर एक गाँव में रहने लगे और खेतों में मजदूरी करने लगे।
समय बीतने के साथ, अकबर को अपनी गलती समझ आने लगी।
उन्हें अपने प्रिय बीरबल की कमी खलने लगी।
उन्होंने बीरबल को ढूँढने का एक अनोखा तरीका निकाला—
“जो कोई मुझे बुद्धि से भरा घड़ा लाकर देगा, उसे हीरों से भरा घड़ा दिया जाएगा।”
यह घोषणा बीरबल तक भी पहुँची।
गाँव वाले इकट्ठे हुए और घड़ा बनाने की कोशिश करने लगे, लेकिन कोई हल नहीं समझ आया।
बीरबल मुस्कुराए और बोले—
“मुझे एक महीने का समय दो।”
उन्होंने घड़े में एक छोटा-सा तरबूज डाल दिया, जो अभी बेल से लगा हुआ था।
महीनों बितते गए और तरबूज बड़ा होकर घड़े के आकार का हो गया।
बीरबल ने वही घड़ा राजा को भेज दिया और संदेश लिखा—
“जिसके पास सच्ची बुद्धिमत्ता है, वह इस घड़े को बिना तोड़े तरबूज निकाल देगा।”
अकबर समझ गए —
ये काम सिर्फ बीरबल ही कर सकते हैं।
अकबर तुरंत सिपाहियों के साथ बीरबल को बुलाने दोड़ पड़े।
अकबर ने बीरबल को गले लगा लिया।
उनकी आँखों में पश्चाताप और खुशी दोनों थे।
कहानी से सीख:
समस्याओं का समाधान धैर्य, समझ और बुद्धि से निकलता है, जल्दबाजी से नहीं।
Akbar Birbal Story in Hindi short
6. सिर्फ एक सवाल
एक दिन एक घमंडी विद्वान अकबर के दरबार में आया।
उसने बीरबल की बुद्धिमानी को चुनौती देने की हिम्मत की।
अकबर ने बीरबल को बुलाकर कहा—
“बीरबल, यह विद्वान तुम्हें चुनौती देना चाहता है।”
विद्वान ने घमंड से कहा—
“तुम मेरे 100 आसान सवालों के जवाब दोगे या एक कठिन सवाल?”
बीरबल ने शांतिपूर्वक कहा—
“मैं एक कठिन सवाल चुनूँगा।”
सब दरबारियों ने साँस रोक ली।
विद्वान बोला—
“पहले क्या आया — मुर्गी या अंडा?”
कुछ क्षण तक बीरबल चुप रहे, फिर बोले—
“पहले मुर्गी आई।”
विद्वान हँसने लगा—
“ये कैसे मान लिया?”
बीरबल सौम्यता से बोले—
“महाराज, मैंने कहा था कि सिर्फ एक सवाल का जवाब दूँगा।
आपका यह दूसरा सवाल है, इसलिए इसका जवाब नहीं दूँगा।”
सारा दरबार हँस पड़ा।
विद्वान शर्मिंदा होकर चला गया।
कहानी से सीख:
सही समय पर सही जवाब सबसे मुश्किल व्यक्ति को भी शांत कर सकता है।
7. मुर्गा और मुर्गी
राजा अकबर ने बीरबल को चकमा देने की योजना बनाई।
उन्होंने सभी मंत्रियों को एक-एक अंडा दिया और कहा कि अगले दिन वफादारी की परीक्षा होगी।
अगले दिन सभी मंत्री शाही तालाब से “अंडा ढूँढकर” ले आए —
दरअसल सबने वही अंडा छुपाकर रखा था।
अब बीरबल की बारी थी।
उन्होंने बहुत तलाश की लेकिन उन्हें कोई अंडा “नहीं मिला” क्योंकि उन्होंने कोई अंडा छुपाकर नहीं रखा था।
जब वे खाली हाथ आए, तो दरबारी हँसने लगे।
अकबर ने कहा—
“बीरबल, तुम अंडा क्यों नहीं ला पाए?”
बीरबल अचानक जोर-जोर से मुर्गे की आवाज़ निकालने लगे।
“कुक्कड़ू-कूं!”
सब हक्के-बक्के रह गए।
बीरबल ने कहा—
“महाराज, क्योंकि मैं मुर्गी नहीं… मुर्गा हूँ। इसलिए मैं अंडा नहीं ला सकता।”
पूरा दरबार ठहाकों से गूंज उठा।
अकबर हँसते-हँसते बोले—
“बीरबल, तुम्हें कोई नहीं हरा सकता।”
कहानी से सीख:
आत्मविश्वास और बुद्धिमानी हर चाल को मात दे सकते हैं।
8. राजा कौन है?
एक बार बीरबल को दूसरे राज्य में दूत के रूप में भेजा गया।
वहाँ के राजा ने बीरबल की बुद्धिमानी के किस्से सुन रखे थे और सोचा कि क्यों न उनको थोड़ा परखा जाए।
राजा ने अपने सभी मंत्रियों को अपने जैसे कपड़े पहनाकर एक जैसी कुर्सियों पर बैठा दिया।
जब बीरबल दरबार में आए तो वे चौंक गए—
कौन राजा है?
लेकिन बीरबल घबराए नहीं।
वे धीरे-धीरे सभी को देखते हुए आगे बढ़े।
कुछ पलों बाद वे एक व्यक्ति के सामने झुक गए।
वही असली राजा थे — और वे हैरान रह गए।
राजा ने पूछा—
“बीरबल, तुमने मुझे कैसे पहचाना?”
बीरबल मुस्कुराकर बोले—
“महाराज, असली राजा कभी दूसरों की ओर मंज़ूरी पाने के लिए नहीं देखता।
लेकिन बाकी सभी आपकी ओर देखकर किसी संकेत का इंतज़ार कर रहे थे।”
राजा बेहद प्रसन्न हुए और बीरबल की तारीफ की।
कहानी से सीख:
असली नेता अपनी पहचान व्यवहार और आत्मविश्वास से बताता है।
9. सोने का सिक्का और न्याय
एक दिन अकबर ने बीरबल से पूछा—
“अगर मैं तुम्हें न्याय और एक सोने का सिक्का चुनने को कहूँ, तो तुम क्या चुनोगे?”
बीरबल बोली—
“महाराज, मैं सोने का सिक्का चुनूँगा।”
सभी दरबारी हैरान रह गए।
अकबर ने भी कहा—
“बीरबल! तुमसे ये उम्मीद नहीं थी।”
बीरबल मुस्कुराए—
“महाराज, आपके राज्य में न्याय की कोई कमी नहीं है।
आप स्वयं न्याय के प्रतीक हैं।
लेकिन सोने का सिक्का मेरे काम आ सकता है।”
अकबर भावुक हो गए और बोले—
“बीरबल, तुमने मुझे फिर सीख दे दी।”
उन्होंने बीरबल को 100 सोने के सिक्के इनाम में दिए।
कहानी से सीख:
जुबान और शब्द सोच-समझकर इस्तेमाल करने चाहिए।
10. आम का पेड़ किसका है?
दो भाई राम और श्याम एक आम के पेड़ को लेकर झगड़ रहे थे।
दोनों कह रहे थे कि पेड़ उन्हीं का है।
मामला बीरबल तक पहुँचा।
बीरबल ने दोनों को देखा और कहा—
“पेड़ को दो हिस्सों में काटकर बराबर बाँट देते हैं।”
राम ने तुरंत कहा—
“ठीक है, काट दो।”
लेकिन श्याम की आँखें भर आईं—
“न-न! कृपया पेड़ को मत काटिए। मैंने तीन साल इसे सींचा है।
पेड़ मुझे दे दीजिए, लेकिन इसे नुकसान मत पहुँचाइए।”
बीरबल मुस्कुरा उठे—
“पेड़ श्याम का है।
क्योंकि असली मालिक वही होता है जिसे अपनी चीज़ से सच्चा लगाव होता है।”
राम शर्मिंदा होकर चुप हो गया।
कहानी से सीख:
सच्चा मालिक वही होता है जो चीज़ की देखभाल दिल से करता है।
11. कौवों की गिनती
एक दिन सुहानी सुबह में बादशाह अकबर और बीरबल शाही बग़ीचे में आराम से टहल रहे थे।
हवा में हल्की-हल्की मिट्टी की खुशबू थी और फूलों की महक वातावरण को और सुंदर बना रही थी। ऐसे ही हल्के मूड में अकबर ने सोचा—
“क्यों न आज बीरबल की बुद्धि थोड़ी और परखी जाए?”
उन्होंने शरारती मुस्कान के साथ पूछा—
“बीरबल! हमारे पूरे राज्य में कुल कितने कौवे हैं?”
सवाल सुनते ही दरबारी डर गए कि अब बीरबल क्या जवाब देंगे।
लेकिन बीरबल शांत खड़े रहे — जैसे कोई रोज़ ऐसी गिनती करता हो।
कुछ ही क्षणों में उन्होंने कहा—
“महाराज, हमारे राज्य में ठीक 80,971 कौवे हैं।”
अकबर चौंक गए।
“अगर इससे ज़्यादा हों तो?”
बीरबल हँसते हुए बोले—
“तो महाराज! वे कौवे दूसरे राज्यों से आपके राज्य की सुंदरता देखने आए होंगे।”
अकबर ने एक और सवाल दाग दिया—
“और अगर इससे कम हों तो?”
बीरबल विनम्रता से बोले—
“तब महाराज, हमारे राज्य के कौवे अपने रिश्तेदारों से मिलने दूसरे राज्यों में गए होंगे।”
अकबर दिल खोलकर हँसे और बोले—
“बीरबल! सच में तुमसे तेज दिमाग कोई नहीं।”
कहानी से सीख:
मुश्किल सवाल भी शांत दिमाग और सकारात्मक सोच से हल किए जा सकते हैं।
12. लालची नाई
एक दिन एक नाई ने अकबर को धोखा देने की योजना बनाई।
वह बोला—
“महाराज! मैं आपको एक जादुई तेल दूँगा जिससे बाल कभी सफेद नहीं होंगे।”
अकबर ने उसे काफी सोना दे दिया।
लेकिन नाई ने दिया सिर्फ साधारण तेल।
कुछ दिनों बाद सच सामने आया।
अकबर ने बीरबल को बुलाया।
बीरबल ने नाई को दरबार में बुलाकर कहा—
“तुम्हारे तेल की परीक्षा करनी होगी।”
उन्होंने नाई के सिर पर वही तेल लगाया और कहा—
“अगर यह तेल सच्चा है, तो आज से तुम्हारे बाल कभी सफेद नहीं होंगे।
लेकिन अगर यह झूठा है, तो तुम्हें दंड मिलेगा।”
नाई डर के मारे रोने लगा और बोला—
“महाराज! गलती हो गई। मुझे माफ कर दीजिए।”
अकबर ने उसे दंड दिया लेकिन साथ ही चेतावनी भी—
“धोखा देकर कभी कोई अमीर नहीं बनता।”
कहानी से सीख:
लालच इंसान को बर्बादी की राह पर ले जाता है।
अकबर–बीरबल की ये छोटी–छोटी कहानियाँ हमें सिखाती हैं कि बुद्धिमानी, धैर्य और सही सोच से हर मुश्किल का हल निकाला जा सकता है।
हमें उम्मीद है कि यह akbar birbal story in hindi short का संग्रह आपको मुस्कुराहट और प्रेरणा दोनों देगा।
अगर आपको ये कहानियाँ पसंद आएँ, तो इन्हें दूसरों तक भी जरूर पहुँचाएँ—क्योंकि अच्छी कहानियाँ बाँटने से और भी खूबसूरत हो जाती हैं।

